13 October 2016

सत्यमेव जयते

झूठ से धन को रंगा,
पाप धोने चले गंगा;
कितना संभालेगी एक नदी,
मेरे पाप तो है अनगिनत लड़ी।

सत्य को क्यों नहीं मैं अपनाता?
क्यों असत्य मे उलझता और उलझाता?
प्यारा है मुझे क्षण-भर का सुख,
चाहे पहुंचे उससे कई दिन का दुख।

है संसार की एक ही रीत,
होती सदेव सत्य की जीत;
सत्य का स्वरूप ही है ऐसा,
निर्बल है उसके आगे भय और पैसा।

कभ समझेगा मन मेरा?
कभ छूटेगा झूठ का बसेरा?
रटा-रटा के थक गया रोहण,
अब तो मान जा मन, समाप्त हो चला यौवन!


26 September 2016

मानव कितना विचित्र है तू!

माँ के गर्भ मे रहता तू,
चार दिवारी में उसे रख न पाता तू;

प्रेमिका के लिए तारे तोडता तू,
क्रोध मे उसी रिशते को तोडता तू;

खुशी में भाई को गले से लगाता तू,
लोभ मे खुशी-खुशी उसका गला काटता तू;

सखा को अपना दर्पण मानता तू,
 फिर भी उससे मात्सर्य रखता तू;

भगवान से अपनी कामना पूर्ती करवाता तू,
भगवान कि आज्ञा का पालन नहीं चाहता तू;

मानव कितना विचित्र है तू!

5 September 2016

ॐ श्री गणेशाय नमः

In July of this year, I visited Pune and  I had the opportunity to visit the Bhuleshwar Temple (the temple is situated in Yavat, which is near Pune). I had read about the temple on the internet and was briefly aware about it.

The temple is dedicated to Lord Shiva and also has some sculptures of Lord Ganesha. One of the sculptures of Ganeshji is in the female form. Here are two images:



I was not aware of the female form of Ganeshji. According to Wikipedia, she is called Vinayaki or Ganeshvari or Ganeshyani.

Unfortunately, I don't know anything about the mythology of Vinayaki. The internet offers some guidance though. Those curious can pursue those leads. I thought this would be good to share on the occasion of Ganesh Chaturthi.

Ganpati Bappa Moriya!